राष्ट्रिय सङ्गोष्ठी संस्कृत-वाङ्मय

Scientific Consciousness in Sanskrit दिनांक: 17 मार्च, 2018

When

17th to 16th March 2018
Starting at 10AM

Where

तिलक शास्त्रार्थ-सभागार, सरस्वती परिसर उ.प्र. राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद- 211021 (उ.प्र.)

Organized By

मानविकी विद्याशाखा उ.प्र. राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद मोबाइल नं. - 7525048050, 9412394602 ई-मेल:vkguptasanskrit@gmail.com वेबसाइट www.uprtou.ac.in

Patron

प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह

कुलपति

Organizing Secretary

डाॅ. विनोद कुमार गुप्त

उपनिदेशक/एसो. प्रोफेसर मानविकी विद्याशाखा

Coordinators

डाॅ. रुचि बाजपेई

असि. प्रोफेसर मानविकी विद्याशाखा

Co - Organizing Secretaries

डाॅ. स्मिता अग्रवाल

शैक्षणिक परामर्शदाता मानविकी विद्याशाखा

Seminar Director

डाॅ. आर.पी.एस.यादव

निदेशक मानविकी विद्याशाखा

विश्वविद्यालयः एक दृष्टि में-

इस विश्वविद्यालय की स्थापना उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, अधिनियम 1999 उत्तर प्रदेश (अधिनियम संख्या-10, 1999) के अन्तर्गत हुई। इस विश्वविद्यालय को दूरस्थ शिक्षा योजना के अन्तर्गत एक मुक्त विश्वविद्यालय, बनाया गया, जिससे पूरे उत्तर प्रदेश में सुनियोजित ढंग से उच्च शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार दूरस्थ प्रणाली के माध्यम से संचालित हो सके। आबादी के एक बड़े क्षेत्र मे काम कर रहे लोगों, गृहणियों और अन्य वयस्कों को उच्च शिक्षा से जोड़ने तथा उनके उन्नत भविष्य के लिए ज्ञानार्जन हेतु विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। अपने स्थापनाकाल से ही विश्वविद्यालय दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के रूप में आबादी के बड़े क्षेत्रों और विशेष रूप से, वंचित समूहों में, के लिए उच्च शिक्षा के लिए पहुँच प्रदान करने की योजना काम पर काम कर रहा है। उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश सरकार का एक मात्र मुक्त विश्वविद्यालय है। इस विश्वविद्यालय का नामकरण हिन्दी के प्रबल समर्थक, प्रख्यात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, भारतरत्न राजर्षि पुरुषोŸाम दास टण्डन के नाम पर किया गया। यह विश्वविद्यालय गृहिणियों, विकलांगों, दलितों, आर्थिक रूप से विपन्न वर्ग, सेवारत व्यक्तियों तथा सुदूर ग्रामीण अंचलों के निवासियों तक उच्च शिक्षा को पहुँचाने के लिए दृढ़ संकल्प है। अत्यल्प समय में ही इस विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवीन कीर्तिमान स्थापित किए हैं।इस विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश है। यह विश्वविद्यालय अध्ययन केन्द्रों तथा क्षेत्रीय केन्द्रों के माध्यम से उच्च शिक्षा के प्रकाश को जन-जन तक पहुँचा रहा है। विश्वविद्यालय का मुख्यालय सेक्टर-एफ, शांतिपुरम्, फाफामऊ इलाहाबाद में स्थित है। इलाहाबाद रेलवे जंक्शन से विश्वविद्यालय की दूरी लगभग 15 किमी. तथा बस स्टैण्ड से लगभग 13 किमी. है। विश्वविद्यालय आने -जाने के लिए यातायात की सुविधाएँ सदैव उपलब्ध रहती हैं।

इलाहाबाद एक दृष्टि में-

इलाहाबाद का प्राचीन नाम प्रयाग है। गंगा, यमुना एवं अन्तःसलिला सरस्वती के पावन तट पर स्थित प्रयाग के वर्णन से सभी धार्मिक एवं साहित्यिक वाङ्मय भरे-पड़े हैं। गंगा, यमुना एवं सरस्वती की त्रिवेणी के साथ-साथ यहाँ अध्यात्म, राजनीति एवं साहित्य की भी त्रिवेणी प्रवहमान है। शैक्षणिक उपलब्धियों और कला संस्कृति की नगरी का अपना भव्य इतिहास है। यहाँ संगम के तट पर प्रत्येक वर्ष माघमेला तो बारह वर्षों के अन्तराल पर विश्वप्रसिद्ध महा कुम्भ मेला का आय्ा®जन ह®ता है। इलाहाबाद की इस पावन धरती पर अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया है। मार्च महीने में इलाहाबाद का मौसम हल्की गर्मी के साथ सामान्य एवं खुशनुमा रहता है।

संगोष्ठी के बारे में -

संस्कृत-वाङ्मय एक ऐसा वाङ्मय है, जिसमें विश्व के समस्त प्रमेयों के विषय में साहित्य समुपलब्ध होता है। यह ज्ञान के साथ-साथ अनुसन्धान की विविध शाखाओं में हमारी उपलब्धियों का सतत संवाहक है, संरक्षक है, मार्गदर्शक है। इसीलिये भारतीय मनीषा किसी भी प्रश्न का उŸार-प्राप्ति की जिज्ञासा लिये संस्कृत-वाङ्मय की ओर उन्मुख होता है। आज का युग विज्ञान का युग है। संस्कृत-वाङ्मय की विविध शाखाओं में तŸाद् वैज्ञानिक संचेतना, चाहे सूत्र रूप में ही क्यों न हो, प्राप्त होती है। वेदों में जहाँ एक ओर ओजोनपरत के संरक्षण, भ्रूणहत्या, शून्य आदि के विषय में संचेतना दिखायी देती है,वहीं दूसरी ओर संस्कृत-साहित्य में “इयमनभ्रा वृष्टिः” से रसायनशास्त्र की ओर भी चेतना जाती हुई दिखायी देती है। पर्यावरण के संरक्षण के प्रति वैदिक ऋषि से लेकर आज का संस्कृत-कवि भी जागरूक दिखायी देता है। वैदिक युग में चिकित्साविज्ञान भी समुन्नत तकनीक पर आधारित था। गणितविज्ञान, चिकित्साविज्ञान, भौतिकविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान, प्राणिविज्ञान, रसायनविज्ञान, ज्योतिष्, पर्यावरणविज्ञान, वास्तुविज्ञान, सैन्यविज्ञान, कृषिविज्ञान, वृष्टिविज्ञान, प्रौद्योगिकी, पशुविज्ञान आदि समस्त मानवीय विद्याओं के विषय में पुरातन काल से ही चिन्तन, मनन, अन्वेषण होता रहा है। अतः प्रश्न उठता है कि संस्कृत-वाङ्मय में इनकी क्या स्थिति है ? प्रकृत वाङ्मय में स्वतन्त्र वैज्ञानिक ग्रन्थों का भी प्रणयन किया गया, यथा- बृहत्संहिता, समराङ्गणसूत्रधार, अपराजितपृच्छा आदि, जिनके विषय में शोधपरक चर्चा अपेक्षित प्रतीत होती है। वैज्ञानिकों के द्वारा संस्कृत भाषा को संगणक(कम्प्यूटर) के लिये सर्वाधिक उपयुक्त भाषा स्वीकार किया गया है। नासा के वैज्ञानिकों का कथन है कि आगे आने वाले समय में संगणक संस्कृत भाषा पर आधारित होंगे। अतः किस रूप में संस्कृत संगणक के लिये उपयुक्त है? इन्हीं दो प्रश्नों को ध्यान में रखकर शोधपरक पत्रों के माध्यम से चर्चा हेतु यह राष्ट्रिय सङ्गोष्ठी आयोजित की जा रही है, जिससे विज्ञान के क्षेत्र में संस्कृत-वाङ्मय के अवदान का निर्धारण किया जा सके एवं हमारे प्राच्य ऋषियों एव कवियों की वैज्ञानिक संचेतना विषयक यह सङ्गोष्ठी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके। संगोष्ठी के उपविषय:- यद्यपि आप संस्कृत-वाङ्मय के अनुरागी हैं। आपने इस वाङ्मयरूपी महासागर में बार-बार अवगाहन किया है तथापि चर्चा-सौविध्य के लिये कतिपय उपविषयों पर अनुसंधानपरक शोध-पत्र-प्रस्तुति हेतु हम प्रार्थना करते हंै- 1. वेदों में वैज्ञानिक संचेतना 2. स्मृतियों में वैज्ञानिक संचेतना 3. पुराणों में वैज्ञानिक संचेतना 4. रामायण में वैज्ञानिक संचेतना 5. महाभारत में वैज्ञानिक संचेतना 6. संस्कृत-साहित्य में वैज्ञानिक संचेतना 7. स्वतन्त्र वैज्ञानिक ग्रन्थों में वैज्ञानिक संचेतना 8. संस्कृत एवं संगणकविज्ञान

शोध-पत्र भेजने का विवरण

ऊपर दिये गये विषयों में से या सङ्गोष्ठी पर आधारित अन्य विषयों में से किसी एक विषय पर अधिकतम एक पृष्ठ का कम्प्यूटरटङ्कित शोधपत्र का सार दिनाङ्क 10 मार्च, 2018 तथा शोध-पत्र 15 मार्च, 2018 तक ई-मेल आहनचजंेंदेातपज/हउंपसण्बवउ के माध्यम से भेज दें। शोधपत्र की भाषा संस्कृत, हिन्दी अथवा अंग्रेजी में से कोई एक हो सकती है। शोधपत्र-प्रस्तुति के समय शोधपत्र की हार्डकॉपी एवं सी.डी. जमा करना अनिवार्य है। शोधपत्रसार के साथ पंजीकरण प्रपत्र भी अवश्य भेजें।शोध पत्र A4 साइज कागज पर एम.एस. वल्र्ड देवनागरी लिपि में क्रुतिदेव 10 (फॉण्ट साइज 14) में तथा अंग्रजी में टाइम्स न्यू रोमन (फॉण्ट साइज 12) में टङ्कित होना चाहिये। संगोष्ठी के विषय में विस्तृत जानकारी के लिए 7525048021, 7525048050, 7525048026, 7525048059 पर सम्पर्क किया जा सकता है।

Other Details

 Registration Fees

Category Name  Early (Rupees)()  Late  On Spot  Fee (In Dollar)($)
 Academicians  500  N/A  500  --

Registration fees is to be paid through Demand Draft/Online payment in favour of Finance Officer, UPRTOU, Allahabad, & should be sent to the organizing secretary at the university address along with the registration form before the last date. MO & cheque will not be allowed/accepted. Prior confirmation of participation either through e-mail or telephone shall be required. On spot registration fee is to be paid in cash.


 Food & Accommodation

भोजन एवं आवास-व्यवस्था:- विश्वविद्यालय द्वारा संङ्गोष्ठी-दिवस को मध्याह्न भोजन एवं जलपान की व्यवस्था की जायेगी, किन्तु यात्रा-भŸाा देय नहीं होगा। विश्वविद्यालय-परिसर में स्थित अतिथि-गृह में अतिथियों की पूर्व सूचना के अनुरूप सङ्गोष्ठी के दिन आवास की व्यवस्था की जायेगी। प्रतिभागियों को अपनी आवासीय व्यवस्था स्वयं करनी होगी। प्रतिभागियों से अनुरोध है कि वे अपने आगमन की सूचना दूरभाष/ई-मेल द्वारा अवश्य दें, जिससे किसी प्रकार की असुविधा न हो।

Contact Us

And send your fully filled Registration Form at vkguptasanskrit@gmail.com

डाॅ. आर.पी.एस.यादव : 7525048021
: 7525048050
डाॅ. स्मिता अग्रव : 7525048026

Location and Venue

Venue

तिलक शास्त्रार्थ-सभागार, सरस्वती परिसर उ.प्र. राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद- 211021 (उ.प्र.)

www.uprtou.ac.in

Additional details

The University is situated at Shantipuram Sector F, Phaphamau, Allahabad which is equipped with good infrastructure facilities like Buildings, Library, Wi-Fi network, Guest House, Media Center campus etc.

And send your filled Registration Form to

डाॅ. आर.पी.एस.यादव मानविकी विद्याशाखा